नवग्रह अक्षत कुंडली पूजा
आपकी जन्मकुंडली के लग्न, राशि, महादशा, पंचम एवं नवम स्थान के अनुसार कस्टमाइज्ड पंच-ग्रही अभिषेक पूजा — मनःकामना पूर्ति, विघ्न-बाधा निवारण एवं भाग्योदय हेतु।
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बेसिक— अक्षत पूजन
- संकल्प एवं अक्षत ग्रह-स्वरूप निर्माण
- ब्रह्म स्वरूप नवग्रह स्थापना
- विष्णु एवं रुद्र स्वरूप पूजन
- प्रसाद आपके पते पर भेजा जाएगा
स्टैंडर्ड— पंच-ग्रही अभिषेक
- पूर्ण नवग्रह अक्षत कुंडली पूजा (बेसिक सहित)
- अग्नि स्वरूप हवन
- रुद्राभिषेक एवं नांदी श्राद्ध पितृ पूजन
- लग्न ग्रह उपरत्न एवं रक्षा सूत्र
नवग्रह अक्षत कुंडली पूजा
जन्मकुंडली जीवन चक्र के उतार-चढ़ावों का रोड मैप है — एक मानचित्र, एक गाइड कार्ड, एक अंकसूची — कितने सकारात्मक प्राप्तांक हैं और कितने नकारात्मक! नवग्रह ऊर्जा, ब्रह्मा-विष्णु-शिव की असंख्य रुद्र शक्ति के संयोजन से यह सौर मंडल गतिमान है, और सूक्ष्म से अतिसूक्ष्म ग्रह गोचर का गमन जीवन चक्र की सभी घटनाओं व निर्णयों को प्रभावित करता है।
दैविक, भौतिक और आध्यात्मिक चिंतन से लेकर सफलता, धन, स्वास्थ्य, शिक्षा, संतान, संपत्ति और जीवनसाथी तक — सभी भावों में कर्म और भाग्य किस करवट बैठेंगे, इसका वर्णन जन्मकुंडली में एक रिपोर्ट कार्ड की तरह उपस्थित होता है।
बारह भावों से जुड़े लाभ
लग्न भाव मन के कार्य होना, ग्रह विघ्न दूर होना
द्वितीय भाव वाणी, संपत्ति एवं धन संबंधित विघ्न शांत होना
तृतीय भाव पराक्रम, भाई-बहिन संबंधित विघ्न दूर होना
चतुर्थ भाव संपत्ति, स्व-निवास, गृह सुख संबंधित कार्य सही होना
पंचम भाव शिक्षा, संतान एवं प्रेम संबंधों के विघ्न दूर होना
षष्ठम भाव रोग, शत्रु बाधा, ऋण एवं न्यायालय विघ्न दूर होना
सप्तम भाव वैवाहिक एवं साझेदारी संबंधों में शांति होना
अष्टम भाव भय, दुर्घटना-चिंता व नए प्रकल्पों का तनाव दूर होना
नवम भाव भाग्य-कर्म तालमेल एवं धर्म-कर्म विघ्न दूर होना
दशम भाव कार्यक्षेत्र एवं विशेषज्ञता संबंधित विघ्न दूर होना
एकादश भाव इच्छित आय, धन आगमन एवं बचत में सफलता
द्वादश भाव व्यय नियंत्रण एवं अंतर्मन संतुलन संबंधित विघ्न दूर होना
यह पूजा किनके लिए है
नवग्रह अक्षत कुंडली पूजा विशेष रूप से इन कार्यों में विघ्न-बाधाओं को दूर करने हेतु की जाती है — मनःकामना की पूर्ति, धन-संपत्ति विवाद, कोर्ट केस, संतान प्राप्ति, शिक्षा क्षेत्र में सफलता, प्रेम विवाह, विवाह में देरी, रोग भय, भाग्य में गति न होना, कार्यक्षेत्र में सफलता-प्रमोशन, तथा श्रेष्ठ स्वास्थ्य प्राप्ति आदि।
पूजा विधि
इस पूजा में जन्मकुंडली के लग्न, राशि, महादशा, पंचम एवं नवम स्थान के ग्रहों के साथ योगकारक ग्रहों की विशेष पंच-ग्रही अभिषेक पूजा की जाती है — नाम, गौत्र एवं इच्छित संकल्प के अनुसार।
अक्षत द्वारा आपकी जन्मकुंडली का ग्रह-स्वरूप पूजा हेतु निर्माण एवं ब्रह्म स्वरूप नवग्रह स्थापना।
विष्णु स्वरूप एवं रुद्र स्वरूप पूजन-अभिषेक।
अग्नि स्वरूप हवन — इस प्रकार पांचों स्वरूपों में नवग्रह पूजन सम्पन्न होता है।
श्री गणेश, लक्ष्मीनारायण, बृहस्पति पुण्याहवाचन, मंडल मातृकाएं पूजन, नांदी श्राद्ध पितृ पूजन एवं रुद्राभिषेक।
उत्तर पूजन, नैवेद्य, भोग, आरती, प्रदक्षिणा एवं क्षमापना।
लग्न ग्रह का उपरत्न, रक्षा सूत्र एवं श्री यंत्रम् प्रसाद स्वरूप भेंट किया जाता है।
पूजा हेतु आवश्यक जानकारी
यह पूजा पूर्णतः आपकी जन्मकुंडली पर आधारित है, अतः पूजा से पूर्व निम्न विवरण भेजना आवश्यक है — जन्म दिनांक, जन्म समय एवं जन्म स्थान। यह जानकारी आप संकल्प फॉर्म में भर सकते हैं। पूजा उपरांत प्रतिदिन के स्वाध्याय हेतु ग्रहों के मंत्रोच्चार के साउंड ट्रैक्स भी दिए जाते हैं।